| Film: | Swades (2004) |
| Music: | A R Rahman |
| Lyrics: | Javed Akhtar |
| Singer (s): | A R Rahman |
| Starring: | Shahrukh Khan, Gayatri Joshi |
हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ
निंदिया तू आ
हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ
आहिस्ता-आहिस्ता -२
निंदिया तू आ, इन दो नैनों में
हल्के से हौले से, कुछ सपने भोले से
निंदिया तू ला, इन दो नैनों में
हो
बहें सोई-सोई जैसे सारी हवाएं
समाँ भी है सोया-सोया सा
निंदिया रे, निंदिया रे, तू मेरे अंगना रे
आ जा रे
इन झुकती पलकों पे छा जा रे
आहिस्ता-आहिस्ता -२
निंदिया तू आ
ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ हूँ
मुलायम-मुलायम सी नीली-नीली रात है
थपकती हैं इस दिल को यादें कई
यादों के पालने में कोई खोई-खोई बात है
ओ निंदिया अब आ के तू मेरी बीती लोरी गा के
मेरी खोई सपने दिखला दे
हाय
यादों का पलना झुला दे
आहिस्ता-आहिस्ता -२
निंदिया तू आ, इन दो नैनों में
आहिस्ता-आहिस्ता -२
निंदिया तू आ
ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ हूँ
ह्म
ह्म
महकी हवा की रेशमी चादर कहो तो बिछा दूँ
नील गगन से चाँद को ले के तकिया बना दूँ
चाँदनी
ला के, तुमको ओढ़ा के, मैं गुनगुनाऊँ गीत कोई
उस पल ही, चुपके से फिर निंदिया
आ जाये
सा : पलकों पे जैसे ठहर जाये
ओ
मीठी-मीठी निंदिया आये
आहिस्ता-आहिस्ता -२
निंदिया तू आ, इन दो नैनों में
हल्के से हौले से
कुछ सपने भोले से, निंदिया तू ला, इन दो नैनों में
बहें सोई-सोई जैसे सारी हवाएं
समाँ भी है सोया-सोया सा
निंदिया रे, निंदिया रे, तू मेरे अंगना रे
जा रे
आ जा रे
इन झुकती पलकों पे छा जा रे
आहिस्ता-आहिस्ता
आहिस्ता-आहिस्ता
ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ हूँ
अ : ऊँ हूँ
देखो ना, ज़रा देखो ना
तुम हो, मैं हूँ और ये तनहाईयाँ हैं
देखो ना, ज़रा देखो ना
कैसी नरम सी ये परछाईयाँ हैं
सुनो ज़रा, सुनो ज़रा, धड़कनों की सदा
सुनो ज़रा, सुनो ज़रा, गीत ख़ामोशी का
सुनो ज़रा, सुनो ज़रा, कहती हैऽऽ रात क्या
उ : रात है ले के आई, कितने अरमाँ अंजाने
कहती है सौ अफ़साने, सुनता हूँ मैं
रात ने ली अंगड़ाई, अनहोनी बात है होती
बिखरे हैं जैसे मोती, चुनता हूँ मैं
तुमने ये क्या कह दिया
मेरी आँखों में दिये हैं जैसे जल गये
तुमने ये क्या कह दिया
मेरी रातों के अंधेरे जैसे ढल गये
तुमसे ही तो मिल के मैंने जाना है सपने क्या होते हैं
ओ हो हो
तुमसे ही तो मिल के मैंने जाना है दिल कैसे खोते हैं
ओ हो हो
चाँदनी से भी प्यारी मुझको इन पलकों की छाँव
तुमने बसाया मेरे दिल में इक सपनों का गाँव
तुमने मुझको चाहा तो मौसम रंग छलकाता है
हर पंछी अब गाता है मेरे लिये
तुमने मुझको चाहा तो जीवन की सारी राहें
खोले हैं अपनी बाँहें मेरे लिये
देखो ना ज़रा देखो ना
तुम हो मैं हूँ और ये तनहाईयाँ हैं
देखो ना ज़रा देखो ना
कैसी नरम सी ये परछाईयाँ हैं
तुम बिन दिन सूने थे, रातें सूनी थीं, वीरानी थी छाई
ओ ओ ओ
अब जैसे दिन चमके रातें महकी हैं तुम हो जो हमराही
ओ ओ ओ
तुम बिन जैसे मैं थी अधूरी पूरी हो गई हूँ मैं
तुमको पा के जग पाया है पर ख़ुद खो गई हूँ मैं
हम दोनों ने अब जाना जीने का मतलब क्या है
पहले क्या थी अब क्या है ये ज़िंदगी
हम दोनों ने अब जाना दुनिया कितनी प्यारी है
पाई कितनी सारी है हमने ख़ुशी
देखो ना ज़रा देखो ना
तुम हो मैं हूँ और ये तनहाईयाँ हैं
देखो ना ज़रा देखो ना
कैसी नरम सी ये परछाईयाँ हैं
सुनो ज़रा, सुनो ज़रा, धड़कनों की सदा
सुनो ज़रा, सुनो ज़रा, गीत ख़ामोशी का
सुनो ज़रा, सुनो ज़रा, कहती है रात क्या
आ आ आ आ
पल पल है भारी वो विपदा है आई
मोहे बचाने अब आओ रघुराई
आओ रघुवीर आओ, रघुपति राम आओ
मोरे मन के स्वामी, मोरे श्रीराम आओ
राम-राम जपती हूँ, सुन लो मेरे राम आओ
राम-राम जपती हूँ, सुन लो मेरे राम जी
बजे सत्य का डंका, जले पाप की लंका
इसी क्षण तुम आओ, मुक्त कराओ,
सुन भी लो अब मेरी दुहाई
पल पल है भारी, वो विपदा है आई
मोहे बचाने अब आओ रघुराई
राम को भूलो, ये देखो रावन आया है
फैली सारी सृषटी पर जिसकी छाया है
क्यों जपती हो राम-राम तुम?
क्यों लेती हो राम नाम तुम?
राम-राम का रटन जो ये तुमने है लगाया
सीता, सीता तुमने राम में ऐसा क्या गुन पाया?
गिन पायेगा उनके गुण कोई क्या, इतने शब्द ही कहाँ हैं
पहुंचेगा उस शिखर पे कौन भला, मेरे राम जी जहाँ हैं
जग में सबसे उत्तम हैं, मर्यादा पुरुषोत्तम हैं
सबसे शक्तिशाली हैं, फिर भी रखते संयम है
पर उनके संयम की अब आने को है सीमा
रावण समय है माँग ले क्षमा
बजे सत्य का डंका, जले पाप की लंका
आये राजा राम, करें हम प्रणाम
संग आये लक्षमन जैसे भाई
पल पल है भारी, वो विपदा है आई
मोहे बचाने अब आओ रघुराई
राम में शक्ति अगर है, राम में साहस है तो
क्यों नहीं आये अभी तक वो तुम्हारी रक्षा को?
जिनका वर्णन करने में थकती नहीं हो तुम यहाँ
ये बताओ वो तुम्हारे राम हैं इस पल कहाँ??
म : राम हृदय में हैं मेरे, राम ही धड़कन में हैं
राम मेरी आत्मा में, राम ही जीवन में हैं
राम हर पल में हैं मेरे, राम हैं हर श्वास में
राम हर आशा में मेरी, राम ही हर आस में
हो
राम ही तो करुणा में हैं, शान्ति में राम हैं
राम ही हैं एकता में, प्रगती में राम हैं
राम बस भक्तों नहीं, शत्रु की भी चिंतन में हैं
देख तज के पाप रावण, राम तेरे मन में हैं
राम तेरे मन में हैं, राम मेरे मन में हैं -२
राम तो घर घर में हैं, राम हर आँगन में हैं
मन से रावण जो निकाले, राम उसके मन में हैं -२
हो
पल पल है भारी, वो विपदा है आई
मोहे बचाने अब आओ रघुराई
( सुनो राम जी आये, मोरे राम जी आये
राजा रामचंद्र आये, श्री रामचंद्र आये
राम जी आये, मोरे राम जी आये
श्री रामचंद्र आये
हो ) -२
हे
( साँवरिया साँवरिया, मैं तो हुई बाँवरिया
तूने मन मोह लिया, साँवरिया हो ) -२
उलझा सा ये मन है, सुलगा सा ये तन है
सपनों का सावन है, नैनों का आँगन है
छलके मन गागरिया
साँवरिया हो -२
साँवरिया साँवरिया, मैं तो हुई बाँवरिया
तूने मन मोह लिया, साँवरिया हो
जो तू यूँ पास आया है
जो तू यूँ दिल पे छाया है
तो मैंने क्या पाया है
कैसे कहूँ
हाँ
कहीं धड़कन की कलियाँ हैं
कहीं सपनों की गलियाँ हैं
जो मन में रंगरलियाँ हैं
कैसे कहूँ
तू जो मुझे ऐसे बहकाये
कभी कभी मुझे तो बड़ी लाज सी आये
भूली हूँ मैं जैसे अपनी डगरिया
जब से है देखी मैंने प्रेम-नगरिया, प्रेम-नगरिया
साँवरिया साँवरिया, मैं तो हुई बाँवरिया
तूने मन मोह लिया, साँवरिया होऽ
तू जो मिला मुझे तो ये सारा समाँ बदल गया
खिलने लगे फूल से मेरी राह में
फिर यूँ लगा मुझे कि ये धरती नई हुई
नया अंबर हुआ तेरी और मेरी चाह में
चंचल हवा तराना कोई गाये
नदिया भी कोई कहानी कहती जाये
जबसे मिली सजना तुझसे नजरिया
खो गई है सुध-बुध की मुझसे गठरिया
साँवरिया साँवरिया -२
मैं तो हुई बाँवरिया
तूने मन मोह लिया
साँवरिया हो
( ये जो देस है तेरा, स्वदेस है तेरा
तुझे है पुकाराऽऽ
ये वो बंधन है जो कभी टूट नहीं सकता ) -२
मिट्टी की है जो ख़ुश्बू, तू कैसे भुलायेगा
तू चाहे कहीं जाये, तू लौट के आयेगा
नई-नई राहों में, दबी-दबी आहों में
खोये-खोये दिल से तेरे कोई ये कहेगा
ये जो देस है तेरा, स्वदेस है तेरा
तुझे है पुकारा
ये वो बंधन है जो कभी टूट नहीं सकता
तुझसे ज़िंदगी है ये कह रही
सब तो पा लिया, अब है क्या कमी
यूँ तो सारे सुख हैं बरसे
पर दूर तू है अपने घर से
आ लौट चल तू अब दिवाने
जहाँ कोई तो तुझे अपना माने
आवाज़ दे तुझे बुलाने
वही देस
ये जो देस है तेरा, स्वदेस है तेरा
तुझे है पुकाराऽऽ
ये वो बंधन है जो कभी टूट नहीं सकता
ये पल हैं वही, जिसमें हैं छुपी
पूरी इक सदी, सारी ज़िंदगी
तू न पूछ रास्ते में काहे
आये हैं इस तरह दोराहे
तू ही तो है राह जो सुझाये
तू ही तो है अब जो ये बताये
जाये तो किस दिशा में जाये
वही देऽऽस
ये जो देस है तेरा, स्वदेस है तेरा
तुझे है पुकाराऽऽ
ये वो बंधन है जो कभी टूट नहीं सकता

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